वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 71 of 268
कानन में रहे झलकि कैं, आनन विवि विधु काँति।
सहज चकोरी सखिनि की, अखियाँ निरखि सिराँति॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (32)
आँखों में झलक हो, आनन विवि विधु कांति। सहज चकोरी की सखी, अखियां निरखि सिरंती.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (32)