वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 77 of 268

ज्ञान भजन जो करहु बहु, कौन करै बकवाद। विविध भाँति विंजन करौ, लौन बिना नहिं स्वाद॥ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (34) ज्ञान गान: बहू मैं कुछ भी करूँ, चोदेगा कौन? तरह-तरह के पकवान बनाएं, लौंग के बिना स्वाद नहीं.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (34)
अतिहिं लालची लाल पियहौं निज सखियनि की बलिहारी