बहुत मिले तो संग नहीं, न्यारी न्यारी भाँति।

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 86 of 268

बहुत मिले तो संग नहीं, न्यारी न्यारी भाँति। जुगल प्रेम रस मगन जे, तेई अपनी पाँति॥ - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, मन शिक्षा लीला (37) कई लोगों से मिलेंगे तो साथ नहीं होंगे, एक अनोखा उपहार। जुगल प्रेम रस मगन जे, टाई अपनी पैंती.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, मन शिक्षा लीला (37)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि