वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 87 of 268

कुँवरि चरन अंकित धरनि, देखत जेहि जेहि ठौर। प्रिया चरन रज जानि कै, लुठत रसिक सिरमौर॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (37) जिधर देखो उधर धरती कुँवारों के पैरों से अंकित है। प्रिया चरण रज जानि कै, लुथाट रसिक सिरमौर.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (37)
बहुत मिले तो संग नहीं, न्यारी न्यारी भाँति।प्रीतम के प्रान प्यारी