वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 89 of 268
सब धर्मनि में भ्रमै जिनि, जुगल चरन चितलाइ।
जैसे दुःख परदेस कौ, घर आये तें जाइ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (37)
सभी धार्मिक लोग क्रोध से भरे हुए हैं, वे एक-दूसरे से बातचीत करने में व्यस्त हैं। दुःख घर जाता है, परेड की तरह.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, जीव दशा (37)