वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 9 of 268

कहौ दान कबही भयौ, कहत न आवत लाज। यह बन राधा कुँवरि कौ, इक-छत राजत-राज॥ - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, दान लीला (06) मुझे मत बताओ कि कब डरना चाहिए, मैं यह नहीं कह रहा कि मैं शर्मीला हूँ। याह बन राधा कुँवरि कौ, इका-छत रजता-रज.. - श्री ध्रुवदास, ब्यालिस लीला, दान लीला (06)
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