वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 91 of 268
जौ चाहत है नित्त सुख, अरु मन कौ विश्राम।
'हित धुव्र' हित सौं भजत रहि, पलु-पलु श्यामा श्याम॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (38)
कौन दैनिक सुख चाहता है, कौन मन की शांति चाहता है? 'हित धुव्र' हित सौं भजत रहि, पलु-पलु श्यामा श्याम.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, जीव दशा (38)