वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 92 of 268
पिय-प्यारी के पद-कमल, निसि-वासर करि ध्यान।
रे मन भजन-अनन्य में, मिलवहु मति कछु आन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (38)
अपने प्रियतम के चरणकमलों का ध्यान करें। रे मन भजन-अनन्या पुरुष, मिलवहु मति कछू अन.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन शत (38)