प्रीतम के प्रान प्यारी
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 93 of 268
(राग ईमन)
राधिकावल्लभ प्यारी सोहै तन नील सारी,
सौंधे भींजी अँगिया सुदेस कसि कैं तनी। [1]
अंग-अंग सुमिलि सुभूषन सुदेस अति,
नील मनि पदिक की सोभा कंठ ते बनी॥ [2]
नवल चपल अनियारे कजरारे नैंन,
महा मैंन मन हर्यौ नैंकु ही की चितवनी। [3]
लटक्यौ मुकट और खसि पर्यौ पीत-पट,
'हित ध्रुव' अंक भरे गज-गति-गवनी॥ [4]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (38)
(राग ईमान) राधिकावल्लभ प्यारी सोहै तन निल सारी, सौंधे भीन्जी अंगिय सुदेस कासी कैं तानी। [1]. [3].