प्रीतम के प्रान प्यारी

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 94 of 268

(राग ईमन / कल्याण) राधिका वल्लभ प्यारी, सहजहि सुकुँवारी, अंग-अंग गुन निधि रूप रासि रस की। [1] सलज सुरंग सित असित दीरघ दृग, चितवनि सहजहिं सुखद सरस की॥ [2] सारी नील रही फबि भूषन झलक छबि, हरै दुति दामिनी अरु भान कोटि-दस की। [3] प्रीतम किसोर जू के लोइनि चकोर भए, चितवत 'हित ध्रुव' सोभा नख-ससि की॥ [4] - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (39) (राग ईमान/कल्याण) राधिका वल्लभ मधुर हैं, सहज दयालु हैं, अंग-अंग अमृत से भरा है। [1] बाढ़ सुरंग सहित असित दीर्घ द्रिग, सुखद सरस की चितावनि सहजहिं। [2] सब निल रही फाबि भूषण झलक छवि, हरि दुति दामिनी अरु भान कोटि-दस की। [3] प्रीतम किशोर जू की लोइनी चकोर भे, चितावत 'हित ध्रुव' सोभा नख-ससी की.. [4] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (39)
प्रीतम के प्रान प्यारीवृन्दाविपिन प्रणाम करि