माया कौं सब जग भजै

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 101 of 135

जात जात मैं सब, सबही जात कुजात। रसिक अनन्य अजात की, कहौ कौन सी जात॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [उतरार्द्ध] (20) मेरी एक जाति है, सबकी एक जाति है, सबकी एक जाति है। रसिक दूसरी जाति का है, बताओ कौन सी जाति है.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [बाद में] (20)
चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहिजहाँ कृष्ण राधा तहाँ, जहँ राधा तहँ कृष्ण