आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 104 of 135
जाकों दर्शन इत् मिलै, ताकौं दर्शन उत्त ।
जाकों दर्शन इत् नहीं, ताकौं मिलें न उत्त॥
- श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (21)
ये दर्शन मिले तो वो दर्शन मिले. जिनको पर्याप्त दर्शन नहीं मिलते, जिनको उत्तर नहीं मिलते... - श्री भागवत रसिक, श्री भागवत रसिक के वचन, निर्विरोध मनोरंजन (21)