दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 109 of 135
जीव ईस मिली दोई, नाम रूप गुन परिहरै।
रसिक कहावै सोइ, ज्यों जल घोरै सर्करा॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (5)
जीव ऐसा ही है, नाम रूप छोड़ दिया। रसिक कहावै सोई, ज्यों जल घोरै सरकार.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (5)