जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 108 of 135

राधेजू मेरौ जनम सुधारौ। अब मोंहि वृन्दावन में डारौ॥ - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य राधेजू मेरा जन्म सुधारो। अब वृन्दावन में साधुओं को डर लगता है.. - श्री गोविंदशरण देवाचार्य
आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहींदोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर