मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 111 of 135

काल हू को काल लोकपाल हू को पालनहारो, सबकौ नियंता सदा रहत सुतंत्र है। [1] ब्रह्मा सिव विष्णु सेष जोगी जन जतन करैं, पावत न पार कोऊ ध्यावत उर अंत्र हैं॥ [2] सनकादिक नारद प्रह्लाद अंबरीष आदि, नाँचि नाँचि गावैं बजावैं ताल जंत्र हैं। [3] विविध उपाय करैं भगवत न दीखि परै, मोहन बस करिबे कों राधा नाम मंत्र है॥ [4] - श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी कल मैं लोकपाल हूं, कल मैं रक्षक, सबका नियंत्रक, सदैव राहत का स्रोत हूं। [1]. [3] करो अनेक उपाय, भागवत न दिखे पराई, मोहन हो पास में जो जपे राधा का नाम.. [4] - श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी के वचन।
जोगी ज्ञानी कर्मठीचस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि