चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 112 of 135

खावे नहीं पछिताइ सो, खावे सो पछिताइ। यह जग लाडू भूत कौ, दुहूँ भाँति दुखदाई॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (11) नहीं चाहोगे तो पछताओगे, चाहोगे तो पछताओगे। यह संसार दूध के समान भूत-प्रेत और दुःख से भरा हुआ कहां है.. - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक का भाषण, निर्विरोध मनोरंजन (11)
मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारीकोउ सुकिया कोउ परकिया