चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 116 of 135
लखी जिन लाल की मुसक्यान ,
रसिक भगवत दृग दई असि, ऐंचि कै मुख म्यान॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (40)
लखि जिन लाल की मुस्कायण, रसिक भागवत द्रिग दई असि, ऐंची कै मुख मयाण.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चित ग्रंथ [प्रथम भाग] (40)