पाँयन परि बिनती करै

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 121 of 135

निहं हिंदू नहिं तुरक हम, नहिं जैनी अंग्रेज। सुमन सम्हारत रहत नित, कुंजबिहारी सेज॥ - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (5.7) हम हिंदू नहीं हैं, हम तुर्क हैं, हम जैनी अंग्रेज नहीं हैं। सुमन संग्रह दैनिक कुंजबिहारी मुनि.. - श्री भागवत रसिक जी, भागवत रसिक वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ (5.7)
नैननि देखीं और नहीं, श्रवण सुने नहीं और ।नित मेरौ लालन नित ही लली