चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 125 of 135
पायन परि बिनती करे, से रस मुख्य सिंगार॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (8)
पायन परी बिनाति करे, रस मुख सिंगार.. - श्री भागवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (8)