मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 127 of 135

राधा गुनगान करें, जमुना स्नान करें । जमुना जल पान करें वास वृन्दावन को॥ - श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी राधा की स्तुति करो, यमुना में स्नान करो। वृन्दावन, जमुना का जल पियो.. - श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी के शब्द।
पिय प्यारी के संग रहैकुंज महल रंग हो हो होरी