चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 131 of 135

सम्प्रदाय नवधा भक्ति, वेद सुरसरी नीर। ललिता सखी उपासना, ज्यौं सिंहनी कौ छीर॥ ज्यौं सिंहनी कौ छीर रहै कुंदन के बासन। कै बच्चा के पेट, और घट कौ विनासन।॥ भगवत नित्य विहार पर, सबही के परदा। रहैं निरंतर पास रसिक बर सखी सम्प्रदा॥ - श्री भगवत रसिक - भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (6.9) सम्प्रदाय नवधा भक्ति, वेद सुरसरि नीर। ललिता सखी उपासना, जब तक शेरनी जीवित है.. जब तक शेरनी जीवित है, कुन्दन बसन. जो गर्भ का गर्भ है, जो घाट का विनाश है...भागवत की नित यात्रा, सब पर्दा। रसिक बर सखी संप्रदाय में दृढ़ रहो.. - श्री भागवत रसिक - भागवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ (6.9)
मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारीचस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि