नवरस नित्य बिहार में नागर जानत नित्त

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 21 of 135

नवरस नित्य बिहार में, नागर जानत नित्त। भगवत रसिक अनन्य बर, सेवत मन बुद्धि चित्त॥ - श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (7) नवरस नीति बिहार पुरुष, नगर जानत नित्त। भागवत रसिक अन्य बर, सेवत मन बुद्धि चित्त.. - श्री भागवत रसिक, श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (7)
बेगम अगम निगम कहैंनहिं निर्गुन सर्गुन नहीं