नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 25 of 135

तुष्ट पुष्ट तासौं रहैं, जरा न ब्यापै रोग। बाल अवस्था जुवा पुनि, तिनकौ करैं न भोग॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (8) मैं संतुष्ट हूं, मैं बीमारी से पीड़ित हूं. बल प्रबल जुवा पुनि, तिनकौ न न भोग.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (8)
चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहिनहिं निर्गुन सर्गुन नहीं