ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 45 of 135

कागा कोयल, हंस बग, गुबरीला मदपान। भगवत बरन समान दोऊ, क्रिया पृथक पहिचान॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (21) कागा कोयल, एचएनएस बाग, गुबारिला मदापन। भगवत बरन समान युगल, क्रिया पृथक पहचान.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्द्ध] (21)
आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहींकोउ सुकिया कोउ परकिया