अद्भुत रस की खानि, सदा सुखदानि बिहारिनि रानी
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 87 of 135
अद्भुत रस की खानि, सदा सुखदानि बिहारिनि रानी
- श्री भगवत रसिक
नित्य सुख देने वाली, नित्य रस की अद्भुत खान हैं बिहारिणी रानी की कथा - श्री भागवत रसिक निकुंजेश्वरी श्री किशोरी जी, नित्य सुख देने वाली, नित्य रस की अद्भुत खान हैं।