बानी बीजक बस्तु कौ बीजक बस्तु न होइ

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 88 of 135

बानी बीजक बस्तु कौ बीजक बस्तु न होइ । बीजक बस्तु बतावही, लहै जासु की होइ॥ लहै जासु की होइ, और की, और न पावै । गावै सब संसार, हाथ बिरतले के आवै॥ ऐसौहिं नित्यबिहार स्याम स्यामाँ सुखदानी । भगवत रसिक अनन्य गूढ गुन गावत बानी॥ - श्री भगवत रसिक, भगवतरसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (11.7) बानी बीजक बस्तु क्या है? बिल वैसा ही है जैसा कहा गया था, यह जासूस के लिए है...यह जासूस के लिए है, लेकिन मांगने पर नहीं मिला। गा रही है सारी दुनिया, मैं हाथों को जन्म देने आई हूं.. ऐसौहिं नित्य बिहार स्याम स्याम सुखदानी। भागवत रसिक अन्य गूढ़ गुण गावत बानी.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अनन्यार्सिकभरण ग्रंथ (11.7)
अद्भुत रस की खानि, सदा सुखदानि बिहारिनि रानीमाया कौं सब जग भजै