भगवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहैं सर्बसु छोरी

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 93 of 135

भगवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहैं सर्बसु छोरी - श्री भगवत रसिक भागवत रसिक स्वामिनी जी, दैहें सरबसु छोरी - श्री भागवत रसिक स्वामिनी जी बहुत उदार हैं, वह आपको सब कुछ सौंप देंगी!
चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहिपरिचय :