अहो मधु-पुरी धन्या
Bhakti Rasamrit Sindhu — श्री रूप गोस्वामी
Verse 4 of 8
कदाहं यमुना-तीरे नामानि तव कीर्तयन्।
उद्बाष्पः पुण्डरीकाक्ष रचयिष्यामि ताण्डवम्॥
- श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.156)
कभी-कभी यमुना-तुम्हारे नाम का अनुष्ठान किया जाता है। उदबाशाफ पुण्डरीकाक्ष रचयिष्यामि ताण्डवम्। - श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.156)