जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 2 of 52

अहो सहो नहिं जात अब, बहुत भई नन्दनंद। करूना करि करुनायतन, राखहु जन ‘हरिचंद’॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (31) ओह, मैं इसे अब और सहन नहीं कर सकता, प्रिय भाई नंदानंद। करुं करि करुणायतन, राखु जन 'हरिचंद'.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (31)
जद्यपि हम सब भाँति ही(कवित्त)