जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 47 of 52

श्रीराधे वृषभानुजा तुम तौ दीन-दयाल। केहि हित निठुराई धरी, देखि दीन को हाल॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (18) श्रीराधे वृषभानुजा, आप विनम्र और दयालु हैं। कुछ स्वार्थ पूरे होते हैं, आज की स्थिति देखो.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सर्वस्व भक्त (18)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही