जद्यपि हम सब भाँति ही
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 48 of 52
सुत तिय गृह धन राज्य हू, या में सुख कछु नाहिं।
परमानंद प्रकास एक, कृष्ण-चरन के माहिं॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (7)
घर, धन, राज्य या पुरुष सुख जैसी कोई चीज़ नहीं है। परमानंद प्रकाश एक हैं, कृष्ण चरणों के स्वामी.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सबके भक्त (7)