दोऊ कोक कलानि में, पंडित परम प्रवीन
Bihar Chndrika — श्री किशोरी अलि
Verse 2 of 5
यमुना वृन्दाविपिन की, बरनी केलि अनूप।
करे भावना नित्य जो, होईं भावना रूप॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, बिहार चंद्रिका (85)
वृंदाविपिन की यमुना, बरनी के अनूप। भावना नित्य जो, होइ भावना रूप.. - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, बिहार चंद्रिका (85)