जय जय भानुकुंवरि जय राधा अशरण शरण
Bihar Chndrika — श्री किशोरी अलि
Verse 3 of 5
जै जै रसिक उपासक जिनकी, पद रज मस्तक धारौं।
इनकी कृपा सुदृष्टि किशोरी, की नित केलि निहारौं॥
- श्री किशोरी अलि, सार चंद्रिका
जय जय रसिक उपासक जिसके चरण और मस्तक ऊंचे। किशोरी, उनकी दयालु दृष्टि की कृपा से मैं तुम्हें प्रतिदिन देखता हूं.. - श्री किशोरी अली, श्री चंद्रिका