किती न गोकुल कुल-बधू
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 11 of 20
नाचि अचानक हीं उठे, बिनु पावस बन मोर।
जानति हौं नन्दित करी, यहि दिसि नंद-किसोर॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (11)
अचानक वह नाचने लगी और बीनू मोर बन गई। मैं जानता हूं नंदिता कारी यानी देसी नंद-किशोर को.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (11)