किती न गोकुल कुल-बधू
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 12 of 20
निज करनी सकुचें हिं कत सकुचावत इहिं चाल।
मोहूँ-से अति बिमुख त्यौं सनमुख रहि गोपाल॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (705)
अपना ही काम कठिन है, तुम क्यों नहीं करते, यहाँ आओ। गोपाल मोहन से दूर रहो, उनकी ओर रहो.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (705)