किती न गोकुल कुल-बधू

Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल

Verse 13 of 20

नित प्रति एकत ही रहत, बैस बरन मन एक। चहियत जुगल किसोर लखि, लोचन जुगल अनेक॥ - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (9) हर दिन वही रहता है, आधार वही रहता है लेकिन मन वही रहता है। चाहियत जुगल किशोर लखी, लोचन जुगल अनेक.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (9)
किती न गोकुल कुल-बधूकिती न गोकुल कुल-बधू