किती न गोकुल कुल-बधू
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 15 of 20
सघन कुंज छाया सुखद, सीतल सुरभि समीर।
मनु ह्वै जात अजौं वहै, उहि जमुना के तीर॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (5)
कुंज की सघन छाया सुहावनी, शीतल सुगंधित पवन। मनु वहाँ उड़ रहे हैं, वहाँ यमुना के तीर हैं.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (5)