किती न गोकुल कुल-बधू

Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल

Verse 16 of 20

सीस मुकुट, कटि काछनी, कर मुरली उर माल। यह बानिक मो मन बसौ, सदा बिहारीलाल॥ - श्रीमहाकवी श्री बिहारी लाल, बिहारी सतसई (2) सीस मुकुट कटि काछनि, कर मुरली उर माल। ये बनिक मो मन बसौ, सदा बिहारी लाल.. - श्री महाकवि श्री बिहारी लाल, बिहारी सतसई (2)
किती न गोकुल कुल-बधूकिती न गोकुल कुल-बधू