किती न गोकुल कुल-बधू

Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल

Verse 17 of 20

तजि तीरथ हरि-राधिका, तन-दुति करि अनुराग। जिहिं ब्रज-केलि निकुंज-मग, पग-पग होत प्रयाग॥ - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (4) तजि तीरथ हरि-राधिका, तन-दुति कारी अनुराग। जिहिन ब्रज-केलि निकुंज-मग, पग-पग होत प्रयाग.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (4)
किती न गोकुल कुल-बधूकिती न गोकुल कुल-बधू