किती न गोकुल कुल-बधू

Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल

Verse 3 of 20

गिरि तैं ऊँचे रसिक, मन बूड़े जहाँ हजारु। वहै सदा पसु-नरनु कौं, प्रेम-पयोधि पगारु॥ - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई गिरि बड़ा प्रेमी है, उसका हृदय प्रेम से भरा हुआ है। जो हमेशा जानवरों के बारे में बात करने के लिए मौजूद रहता है, जो प्यार का प्रेमी है.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई
किती न गोकुल कुल-बधूकिती न गोकुल कुल-बधू