किती न गोकुल कुल-बधू
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 4 of 20
जहाँ जहाँ ठाढ़ौ लख्यौ, स्यामु सुभग सिरमौरु।
बिनहूँ उनु छिन गहि रहतु, दृगनु अजौं वह ठौरु॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (7)
जहां भी लिखें अच्छा लिखें. बिनहुं उनु छिन गहि रहतु, द्रिगनु अजौं वा थाउरु.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (7)