किती न गोकुल कुल-बधू

Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल

Verse 5 of 20

जपमाला छापें तिलक, सरै न एकौ कामु। मन कांचे नाचै वृथा, सांचे राचै रामु॥ - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई माला छापो, तिलक सरै न एकौ कामू। मन नाचता व्यर्थ, रामू रचता सांचे.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई
किती न गोकुल कुल-बधूकिती न गोकुल कुल-बधू