किती न गोकुल कुल-बधू
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 7 of 20
किती न गोकुल कुल-बधू, काहि न किहिं सिख दीन।
कौनै तजी न कुल-गली, ह्वै मुरली-सुर लीन॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (22)
कोई गोकुल कुल दुल्हन, कोई सिख दिन कहीं। कौन है उत्तम गली, कहाँ ले गये मुरली-सुरा.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (22)