किती न गोकुल कुल-बधू

Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल

Verse 9 of 20

मोहिं तुम्हैं बाढ़ी बहस, को जीतै जदुराज। अपनैं-अपनैं बिरद की, दुहूँ निबाहन लाज॥ - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (427) मोहिं तुम्हें बधाई बहास, को जैतै जदुराज। मित्रों के बीच मैं लाज लेकर रहता हूँ.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई (427)
किती न गोकुल कुल-बधूकिती न गोकुल कुल-बधू