मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो,

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 110 of 131

मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो, राख्यो श्री हरिदास विपुल बल, भूली न इत उत भटक्यो। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (154) मेरा मन श्री वृन्दावन में अटका हुआ है, श्री हरिदास की प्रचुर शक्ति को धारण करो, उन्हें भूलकर वहाँ मत भटको। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत श्लोक (154) श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी और श्री विट्ठल विपुल देव जी की कृपा से मेरा मन श्री वृन्दावन में इतना रम गया है कि मैं भूलकर भी वृन्दावन धाम छोड़कर इधर-उधर नहीं भटकता।
मेरे विषै विसन वर वामप्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ