साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 118 of 131

सब सारनि कौ सार सुनि, सव तत्वनि को तत्व। विहारिनदास अनन्य मत, बड़ो ममत्य एकत्व॥ - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (151) सब तत्वों का सार सुनो, सब तत्वों का सार सुनो। विहारिन दास अन्य मत, मातृ-प्रेम की एकता बढ़ायें.. - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (151)
नामी नाम न भावईसब ठाकुर कौ ठाकुर हरि, ता ठाकुर की ठाकुर ठकुराँइनि॥