सब ठाकुर कौ ठाकुर हरि, ता ठाकुर की ठाकुर ठकुराँइनि॥

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 119 of 131

सब ठाकुर कौ ठाकुर हरि, ता ठाकुर की ठाकुर ठकुराँइनि॥ - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, रस के सेवैया (1) सब ठाकुर कौ ठाकुर हरि, ता ठाकुर की ठाकुर ठाकुरनीनी.. - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, रस के सेवक (1)
साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोगसाधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग