साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 120 of 131

साधन श्रम न कछु किये, न कछु करने जोग। कृपा बिहारिनिदासी को, सहज संयोगी भोग॥ - श्री बिहारिन देव जी, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (149) कोई शारीरिक श्रम न करें, कोई योग न करें। बिहारिनिदसी की कृपा, सहज स्नोयोगी का आनंद... - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत मित्र बिहारिन देव जी (149)
सब ठाकुर कौ ठाकुर हरि, ता ठाकुर की ठाकुर ठकुराँइनि॥नामी नाम न भावई