नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 125 of 131
श्रीबिहारीदास बिहार मैं, वेद न पावैं जांनि।
सखी जिवावैं प्रेम सौं, महा मधुर रस छांनि॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (420)
वेदों की जननी श्रीबिहारीदास मुझे बिहार में नहीं मिले। सखी जीववैं प्रेम सौं, महा मधुर रस छन.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (420)