श्रीवृन्दावन निधि सब सुख धांम। [1]

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 124 of 131

श्रीवृन्दावन निधि सब सुख धांम। [1] मन क्रम वचन अनन्य भजन बिनु नांमै गावै गुन ग्रांम॥ [2] जांनि भक्ति फल मूल परम पद व्याज विषै छाँड़त नहीं भ्रांम। [3] बाढत कर्म न घटत काहू के सेवत देवन सदा सकांम॥ [4] याही तें धन दारा विवस रस बितवत वृथा गमावत जांम। [5] श्रीबिहारीदास निरभै भज हरि पद चाहत छूट भयौ निहकांम॥ [6] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी श्री वृन्दावन निधि समस्त सुखों और सम्पत्तियों का खजाना है। [1]. [3] जब कर्म बढ़ता है तो घटता क्यों नहीं, फिर भगवान की सेवा सदैव सफल होती है.. [4] अर्थात धन का जीवन व्यर्थ जीवन में व्यतीत होता है। [5] श्री बिहारीदास निराभाई भज हरि पद चाहत छुट भयौ निहकानम्.. [6] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी
साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोगनामी नाम न भावई